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AI interference in Elections: टेक्नॉलॉजी दिग्गजों का चुनाव में AI दखल को रोकने का प्रयास

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AI interference in Elections
AI interference in Elections

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Technology giants’ efforts to stop AI interference in elections

20 से अधिक टेक्नॉलॉजी कंपनियों ने दुनिया भर में होने वाले चुनावों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के दुरुपयोग को रोकने के लिए एक सहयोगी प्रयास पर हस्ताक्षर किए हैं।
इस पहल का उद्देश्य चुनावों में हेरफेर करने के लिए AI के संभावित दुरुपयोग को कम करना है। AI interference in Elections

चिंता का विषय (Matter of concern):

1. तेजी से विकसित हो रही जनरेटिव AI तकनीक चुनावों में हेरफेर करने के लिए एक नया खतरा बनकर उभरी है।
2. यह तकनीक कुछ ही सेकंड में पाठ, छवियों और वीडियो बना सकती है ।
3. जिसका इस्तेमाल गलत सूचना फैलाने और मतदाताओं को गुमराह करने के लिए किया जा सकता है।
4. इस साल दुनिया भर में आधे से अधिक आबादी चुनाव में मतदान करने वाली है।
5. ऐसे में AI के दुरुपयोग की आशंका और भी बढ़ गई है।

पहल के मुख्य बिंदु (Key points of the initiative):

1. इस समझौते में हस्ताक्षर करने वाली कंपनियों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे मेटा, टिकटॉक और X (पूर्व में ट्विटर) शामिल हैं।
2. कंपनियां मिलकर AI द्वारा बनाई गई भ्रामक छवियों, वीडियो और ऑडियो का पता लगाने के लिए उपकरण विकसित करेंगी।
3. वे मतदाताओं को भ्रामक सामग्री के प्रति जागरूक करने के लिए जन जागरूकता अभियान चलाएंगी।
4. वे अपनी सेवाओं पर ऐसी सामग्री पर कार्रवाई करेंगी।

संभावित लाभ (potential benefits):

1. यह पहल चुनावों की निष्पक्षता और सत्यनिष्ठा बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
2. इससे मतदाताओं को गलत सूचना से बचाने में मदद मिलेगी और उन्हें सूचित निर्णय लेने में सक्षम बनाया जा सकेगा।
3. यह तकनीकी कंपनियों को उनके प्लेटफॉर्म पर दुरुपयोग को रोकने के लिए जवाबदेह ठहराएगा।

चुनौतियां (Challenges) :

1. AI द्वारा बनाई गई सामग्री का पता लगाना मुश्किल हो सकता है।
2. खासकर क्योंकि तकनीक लगातार विकसित हो रही है।

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